अथ श्री सिद्धराज नारायण चालीसा 

 

।। श्री पंचदेव सिद्धराज नारायणाय नमः ।।
।। श्री जानकी वल्लभो विजयते ।।
।। ॐ नमः शिवाय पार्वतीपतये नमः।।
।। ॐ गं गणपतये नमः ।।
।। ॐ नमो सिद्धराज भैरवाय बटुक भैरवाय कालभैरवाय नमो नमः।।
।। ॐ गुरेभ्यो कृताकृताचार्य नमः।।

सिद्धराज की महिमा,वर्णन करना चाहूं
पंचदेव के दर पर,अर्जी लगाने आऊं । 1
हे हरि, हर, भैरव कपि, सुन लो मेरा संदेश
गुरु किरपा हो भक्त पर, दूर हों सारे क्लेश ।। 2

प्रथम प्रणाम हरि पालक, विष्णु रूप विराजे धाम
द्वितीय शंभू के चरण परे, करते दंडवत प्रणाम ।। 3
तृतीय भैरव भक्ति कर, लेते शुभ शुभ नाम
बिन कपि महिमा कलि कृते, होते न बिगड़े काम ।। 4
गुरुवर दें आशीष अब, हो सिद्ध मेरे सब काम
भक्ति भाव से हम कर रहे, वंदन आपका हे सिद्धराज धाम ।। 5

नमो नमो जय विष्णु हरि, लिए अवतार नरसिंह राज।
भक्त पर जब आई बला, रख ली प्रहलाद की भक्ति की लाज।। 1

शंख, चक्र, गदा, पुष्प लिए प्रभु, करते हैं सब काज।
जैसे कर्म चक्र बनाया, दिया हमें भूत, भविष्य और आज ।। 2

सत्व वृक्ष में प्रथम पूजित, बैठे हैं निज धाम ।
सिद्धराज धाम में नारायण, करते हैं विश्व कल्याण ।। 3

सतयुग में अवतार कई, त्रेता में हैं राम।
द्वापर में भए कृष्ण वही, कलियुग में कल्कि का किया काम।। 4

कृतयुग जब जोर कसा, मचा हुआ कोहराम ।
सन्मार्ग दिखाने सभी को, दिया गुरु कृताकृता नाम ।। 5

करूं प्रणाम मैं नत मस्तक हो, शिव भगवती को प्रणाम ।
वट वृक्ष विराजे शंभू स्वयं, ले साथ पार्वती,स्कंद, गाम ।। 6

जब जब नारायण उतरे, तब तब शिव लीन्ह अवतार।
धाम न पूरा हो सकता, बिन आए शिव परिवार ।। 7

सिद्धि दाता, माया भंजक, तंत्र कारक हैं देव ।
मुक्ति दायक, भक्त रक्षक, मिटाते सब ही भेव ।। 8

वेणा नदी गंगा स्वरूपिणी, मतवाली है चाल ।
क्षेत्र विदर्भ, हिरण्य वधकारी, अधर्मियों का काल ।। 9

जो पूजे शिव सिद्धराज को, लेकर पंचाक्षर नाम।
मनोरथ हो जैसे भी, भोलेनाथ करें पूरण सब काम।। 10

राम रक्षक, राम दूत, राम नाम के नाम ।
कपि बैठे हैं वृक्ष में ही, इस नारायण धाम ।। 11

प्रेत भूत पिशाच सब भागै, भज लो ग्यारह बार।
काल भी कुछ न कर सके, हनुमत करें जब वार ।। 12

कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहीं होत तात तुम पाहीं ।
अतुलित बलधामी, सिद्धि धारक, राम सेवक मेरे स्वामी ।। 13

मेरे मनोरथ सिद्ध करो प्रभु, समझो प्रभु आदेश ।
दर पर खड़ा, तुम्हें भज रहा, भक्त तुम्हारा मनीष ।। 14

अघोर तंत्र से रक्षा करें, रोकें महाविद्या का दुरुपयोग ।
भैरव नाथ हैं सात्विक रूप में, कृतयुग में ही ऐसा योग ।। 15

काली, चंडी, कैलाश शक्ति, शमशान भैरवी के तंत्र ।
सब कुछ निष्क्रिय करते हैं, भैरव नाथ बलवंत ।। 16

भजे जो प्रातः काल यह चालीसा, लेकर गुरु आदेश ।
बाधा उसकी सब मिटे, मिटते हैं सब क्लेश ।। 17

नारियल बंधन जो करे, धाम में पेशी लगाय ।
भाग्य उसके निश्चित खुलें, हरि पद इति मिली जाय ।। 18

कर्ज मिटे, नौकरी मिले, व्यापार में हो लाभ ।
संतान इच्छा जो करे, हों उसके घर पद्मनाभ ।। 19

दैहिक, दैविक, भौतिक पाप टरे, मनोरथ पूरण होय ।
पाले जो गुरु आज्ञा, शत्रुजयी बन, कार्यसिद्ध सब होय ।। 20

अर्जी बांधे, पाप टरे, सुख हो चारो ओर
माला फेरे, पेशी करे, होते सब दुख दूर ।। 1
गुरु आज्ञा पालक बने, धाम का दर्शन करे
जीवन सफल हो, अंत समय वैकुंठ गण दास बने ।। 2

मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी ।
कृष्णदास मैं, राधा मातु हैं, नृसिंह राम हरि ईष्ट, भक्त हितकारी ।। 6
हनुमंत रूप धरि, शिव महिमा किए, राम भगति जैसे पाई
धाम से निराश न लौटू मैं प्रभु, अर्जी श्री चरणों में मैने लगाई ।। 7

नारायण मेरा कल्याण करें। शंभू मेरा कल्याण करें। भैरव नाथ मेरा कल्याण करें। हनुमंत लाल मेरा कल्याण करें। गुरुदेव मेरा कल्याण करें।

हर हर हर महादेव । जय जय श्री राम । जय जय श्री सिद्धराज धाम।

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