श्री हरसू ब्रह्म जी महाराज
परम रक्षक और मार्गदर्शक
महाराज जी का इतिहास — राजा शालिवाहन और हरसू ब्रह्म
श्री हरसू ब्रह्म जी महाराज, जिन्हें हरसू पाण्डेय के नाम से भी जाना जाता है, 15वीं शताब्दी में राजा शालिवाहन (सालिवाहन) के राजपुरोहित और मंत्री थे। वे माँ कामाख्या के परम साधक हैं और एक सत्त्व परंपरा के परम गुरु के रूप में श्री सिद्धराज सरकार धाम की गद्दी पर विराजमान हैं। उनका मुख्य स्थान बिहार के चैनपुर (भभुआ) में स्थित है — जहाँ राजा शालिवाहन का प्राचीन किला आज भी विद्यमान है, और उसी किले के मध्य में हरसू ब्रह्म धाम स्थित है।
राजा शालिवाहन की कोई संतान नहीं थी, जिससे वे अत्यंत दुखी रहते थे। हरसू पाण्डेय ने राजा को छत्तीसगढ़ से दूसरी रानी लाने की सलाह दी। राजा ने यह सलाह मानी, और दूसरी रानी से एक पुत्र का जन्म हुआ। इस खुशी में राजा ने हरसू पाण्डेय को कुछ भी माँगने पर देने का वचन दिया। उस समय हरसू पाण्डेय अपना एक भव्य महल बनवा रहे थे।
राजा के अन्य मंत्री हरसू पाण्डेय के बढ़ते प्रभाव से ईर्ष्या करने लगे। उन्होंने राजा को भड़काकर झूठ बताया कि हरसू पाण्डेय राजा के किले से भी बड़ा महल बनवा रहे हैं। यह सुनकर राजा क्रोधित हो गया और उसने हरसू पाण्डेय के अधूरे महल को ध्वस्त करवा दिया। इस विश्वासघात से हृदय विदीर्ण होकर हरसू पाण्डेय ने आमरण अनशन शुरू कर दिया।
अपनी मृत्यु से पूर्व, हरसू पाण्डेय ने राजा और चैनपुर राज्य को शाप दिया। माघ मास के एक सोमवार को उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए और 'हरसू ब्रह्म' के रूप में परम शक्ति में विलीन हो गए। उनके देह त्यागने के तुरंत बाद चैनपुर राज्य में भयंकर विपत्तियाँ आने लगीं। अपनी गलती का एहसास होने पर राजा शालिवाहन ने पश्चाताप किया और जहाँ हरसू पाण्डेय ने प्राण त्यागे थे, वहाँ एक समाधि का निर्माण करवाया। राजा ने क्षमा याचना की, और तब से यह स्थान हरसू ब्रह्म धाम के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
आज भी चैनपुर में राजा शालिवाहन के किले के खंडहरों के बीच स्थित हरसू ब्रह्म धाम में भक्तों की भीड़ लगती है। जो भी श्रद्धा से बाबा की पूजा करता है, उसके सभी कष्ट दूर होते हैं — चाहे वह भूत-प्रेत बाधा हो, रोग हो या कोई अन्य संकट। नवरात्र, दुर्गापूजा और माघ नवमी पर यहाँ विशेष श्रृंगार पूजा होती है। माँ कामाख्या की साधना की यह परंपरा आज श्री सिद्धराज सरकार धाम में जीवित है, जहाँ हरसू ब्रह्म जी महाराज धाम की गद्दी पर विराजमान हैं।
धाम में महत्व
असुरक्षा से मुक्ति
माना जाता है कि महाराज जी की कृपा से भक्तों को ऊपरी बाधाओं, नकारात्मक शक्तियों और मानसिक संताप से तुरंत राहत मिलती है।
साधना की शक्ति
धाम में होने वाली सभी साधनाएं महाराज जी की दिव्य उपस्थिति, गुरुमाताजी और महागुरु जी के निर्देशन में सफल मानी जाती हैं।
महाराज जी की दिव्य उपस्थिति, गुरुमाताजी और महागुरु जी के निर्देशन में।
महाराज जी के आशीर्वाद और धाम के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें।
संपर्क करें