स्वयं सात्त्विक तंत्रों की सिद्धि प्राप्त करें, और आपकी समस्याओं को धीरे धीरे कर स्वयं ही समाप्त करें

सात्त्विक तंत्र सिद्धियों को देवताओं को प्रसन्न करके बीज मंत्रों द्वारा प्राप्त किया जाता है

एक सत्त्व आश्रम की ओर से प्रत्येक सप्ताह दीक्षा शिविर आयोजित किया जा रहा है |

इस शिविर में 1 दिवसीय, 3 दिवसीय, और 7 दिवसीय ऐसे तीन प्रकार हैं , जिससे अधिकतर साधकों को इसका लाभ दिया जा सके

शिविर का कार्यक्रम निम्नलिखित रहेगा
👉 मठ में कैम्पिंग टेंट में रुकने की व्यवस्था
👉 सात्त्विक तंत्र के नियम के अनुसार जमीन पर सोने की व्यवस्था , गद्दा, पंखा और इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन हर टेंट में उपलब्ध कराया जाएगा
👉 पूरी तरह से सात्त्विक आचरण
👉 गुरु मुख से सात्त्विक तंत्र के बारे में, उनका उपयोग और निषेध इत्यादि की शिक्षा
👉 1 दिन, 3 दिन या 7 दिन सात्त्विक तंत्र के नियमों के अनुसार गुरु की सेवा
👉 प्रत्येक दिन 1008 आहुति यज्ञ दीक्षा के पश्चात, मंत्र की शक्ति को साधक से जोड़ने के लिए
👉 गुरुवार व मंगलवार के दिन महागुरु जी के श्री मुख से प्रवचन
👉 विद्यार्थी और आश्रम के प्रतिनिधि प्रत्येक दिवस सभी के लिए सात्त्विक शाकाहारी आहार मिल जुलकर स्थान पर ही बनाएंगे
👉 नारायणी और गुरु शक्ति के उपयोग की दीक्षा
👉 एक सत्त्व सात्विक सनातन धर्म के प्रचार प्रसार की शिक्षा
👉 जो व्यक्ति 7 दिवसीय शिविर वहन कर सकते हैं, वह 7 दिवसीय शिविर से ही जुड़ें, जिससे आप अधिक से अधिक जाप आश्रम मठ के श्री क्षेत्र में ही समाप्त कर सकें

आश्रम में केवल कुछ ही टेंट की व्यवस्था है, इसलिए एक समय में अधिकतर उतने ही शिष्य दीक्षा प्राप्त कर सकते हैं | इसलिए शीघ्र ही आपका स्लॉट बुक करें |

शिविर बुक करने के लिए 09321390655 पर संपर्क करें |

 


1 दिन, 3 दिन के शिविर और 7 दिन के शिविर में क्या अंतर है ?
3 दिन के शिविर में आप अधिक से अधिक दो दिन गुरु के समक्ष, और साथ में आहुतियाँ दे पाते हैं | 1 दिन के शिविर में एक दिन |  7 दिन के शिविर में आप 6 दिन गुरु के समक्ष आहुति देते हैं | साथ ही श्री क्षेत्र में मंत्र सिद्ध करने का अपना अलग महत्व है |


क्या तांत्रिक तामसिक यक्षिणी, प्रेत इत्यादि सिद्धियाँ भी दी जाती हैं ?

नहीं | एक सत्त्व भगवान नृसिंह नारायण को समर्पित है इसलिए तामसिक बाधाओं को काटने के लिए सात्विक और राजसिक मार्ग का उपयोग किया जाता है


व्यापार नहीं चल रहा है, जीवन में उथल पुथल है, क्या दीक्षा से सुधरेगा ?

भगवान नृसिंह नारायण की महिमा अपरंपार है | यदि आपका विश्वास दृढ़ है, आपकी साधना नियमों के अनुसार होती रहेगी, तो ऐसा कुछ नहीं जो, नारायण के लिए असंभव है


क्या परिवार के साथ आ सकते हैं ?

आश्रम एक मठ है, कोई पिकनिक स्पॉट नहीं | साथ ही आश्रम एक जंगली तरह के स्थान पर है, इसलिए वहाँ बच्चों, स्त्रियों के साथ नहीं रह सकते हैं | साधन के नियम भी ऐसे हैं कि व्यक्ति को अकेले करना पड़ता है


कब से शिविर प्रारंभ होगा ?

शिविर हर गुरुवार को प्रारंभ होता है | गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार का 3 दिवसीय और गुरुवार से गुरुवार 7 दिवसीय शिविर होता है | साधक एक रहे, चाहे सभी टेंट भरे हों, दीक्षा अनवरत चलती है |


क्या कोई सर्टिफिकेट मिलेगा ?

जी, दीक्षा के अंत में दीक्षा प्राप्त होने का सर्टिफिकेट सभी शिष्यों को दिया जाता है | सर्टिफिकेट courier द्वारा 15 दिन के भीतर आपके अड्रेस पर प्राप्त होता है |

 

भगवान नृसिंह नारायण का एक सत्त्व रूप के दक्षिणाभिमुख दर्शन

 

महागुरु जी के ठहरने का स्थान, मीटिंग एरिया, और वैटिंग एरिया तथा रसोईं

 

व्यासपीठ जहां से आप महागुरु जी के आशीर्वाचनों को सुन सकेंगे

 

यज्ञशाला

 

शिष्यों के यज्ञ कुंड लगाने का स्थान

 

 

 

इस स्थान पर टेंट लगाया जाता है

 

 

कॉमन बाथरूम

 

 

 

शिष्यों के टेंट – प्रत्येक शिष्य को एक टेंट रहने के लिए अलॉट किया जाता है

  • जमीन पर बिछाने के लिए ताड़पत्री, और उसके ऊपर सूती गद्दी, तकिया, कंबल, बेड शीट दिया जाता है | यह सामग्री शिविर के समय तक शिष्य के टेंट में उपलब्ध रहती है | ध्यान रहे कि आप मठ में साधन के लिए आ रहे हैं, 5 स्टार हॉलिडे के लिए नहीं | इसलिए अधिकतर कार्य आश्रम में पहुँचने के बाद अपने सभी राग द्वेष अभिमान छोड़कर स्वयं करें |
  • हर टेंट में लाइट, फैन और गर्मी के समय डेसर्ट कूलर की व्यवस्था उपलब्ध रहती है |
  • शाम से लेकर रात्रि भर यज्ञ अनुष्ठान चलते हैं, और दिवस में 4 बजे तक निद्रा लेने का समय होता है |
  • शिविर का मुख्य ध्येय गुरु सेवा है | अपने आप को संसार का सबसे निर्धन व्यक्ति समझकर, गुरु की सेवा करनी चाहिए और सम्पूर्ण समर्पण से दिए गए कार्यों को करना चाहिए | आपकी साधना की सफलता गुरु मंत्र पर निर्भर करती है , उसमें जितनी ऊर्जा आपको प्राप्त होगी, उतने ही शीघ्र आपकी साधना सफल होगी | इसलिए आप अपने निजी जीवन में क्या हैं, यह सब भूलकर, आश्रम के सभी कार्यों में, भजन, कीर्तन में, यज्ञ और व्यवस्था को बनाने में, भोजन पकाने , परोसने, बर्तन धोने, साफ सफाई रखने इत्यादि सभी कर्मों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें | जब तक आप प्राचीन गुरुकुल व्यवस्था का जीवन नहीं जियेंगे, साधनाओं के लिए आपका शरीर उपयुक्त नहीं बनेगा
  • महागुरु जी द्वारा बताए गए सभी वचनों को ध्यान पूर्वक सुनें, हो सके तो लिखते जाएं | यदि महागुरु जी से कोई त्रुटि बोलने मे भी हो, तब भी अपने घमंड या आवेश में आकर रोके नहीं, यह याद रखें कि आप एक सिद्ध पुरुष के समक्ष हैं, जिसके सामने आप अपने निजी जीवन में कितने भी बड़े होंगे, तब भी कुछ नहीं हैं | यह भी ध्यान रखें, कि महागुरु जी काया बदलते हैं, तो यदि उनका शरीर स्थिर या सिथिल हो जाए, तो कोई आवाज न करें, और मठ की गरिमा को बनाए रखें |

आते समय क्या क्या लाएं ?

1. ढीले वस्त्र जितने दिन का शिविर आपने बुक किया है उतने दिन के लिए

2. 1 रुद्राक्ष की माला

3. एक लाल कुर्ता या जैकिट या गमछा

4. एक कोई भी छोटा brass metal का अस्त्र जिसे आप हमेशा अपने पास रख सकें – शंख, बाण , गदा, हल इत्यादि कुछ भी, यही आपकी साधना का आधार बनेगा